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| Geleitspruch des deutschen Spielmanns | [3] |
| Vor dem Morgen (Trojan) | [4] |
| Morgengrauen (Weigand) | [4] |
| Das Christusbild (Sergel) | [5] |
| Neues Leben (Wiener) | [5] |
| In der Frühe (Mörike) | [6] |
| Morgendämmerung (Greif) | [6] |
| Vogelmette (Avenarius) | [6] |
| Die Wolke (Gaudy) | [7] |
| Der Morgen (Sallet) | [8] |
| In Hangen und Bangen (Fontane) | [8] |
| Für und für (Liliencron) | [11] |
| Stille Tränen (Kerner) | [11] |
| In der Frühe (Storm) | [12] |
| Morgenwind (Heyse) | [12] |
| Gruß der Sonne (Keller) | [13] |
| Morgenlied (Meyer) | [14] |
| Pförtners Morgenlied (Schiller) | [15] |
| Guter Rat (Volksmund) | [15] |
| Mittagsstille (Greif) | [16] |
| Um die dritte Stunde (Fischer) | [16] |
| Nach trübem Tage (Gumppenberg) | [17] |
| Abendlied (Rückert) | [17] |
| Der letzte Glanz (Bartels) | [18] |
| Der Sandmann (Vierordt) | [19] |
| Maiabend (Avenarius) | [21] |
| Die Sonne liegt im Sterben (Gilm) | [21] |
| Mailied (Rückert) | [22] |
| Sonnenuntergang (Hölderlin) | [22] |
| Die Großmutter (Salus) | [22] |
| Mondaufgang (Avenarius) | [23] |
| Feierabend (Holz) | [23] |
| Abendlied (Claudius) | [24] |
| Der Abendfriede (Blüthgen) | [25] |
| Abendsegen I (Benzmann) | [32] |
| Abendsegen II (Güll) | [33] |
| Heimgang (Falke) | [33] |
| Abendwolke (Meyer) | [34] |
| Ruhetal (Uhland) | [35] |
| Der Abendfriede (Benzmann) | [35] |
| Abend (Scholz) | [35] |
| Meeresabend (Strachwitz) | [36] |
| Ein Tageslauf (Falke) | [36] |
| Am Abend (Seidel) | [37] |
| Abendlandschaft (Eichendorff) | [37] |
| Abendstille (Busse) | [38] |
| Abendlieder I (Böhm) | [39] |
| Abendlieder II (Sergel) | [39] |
| Abendlieder III (Keller) | [40] |
| Abendlied (Bierbaum) | [41] |
| Ein geistlich Abendlied (Kinkel) | [41] |
| Wanderers Nachtlied (Goethe) | [42] |
| Manche Nacht (Dehmel) | [43] |
| Die tröstende Nacht (Wille) | [43] |
| Nachtgefühl (Greif) | [43] |
| Komm, Trost der Nacht, o Nachtigall! (Grimmelshausen) | [44] |
| Trost der Nacht (Jacobowski) | [44] |
| Nähterin Nacht (Benzmann) | [44] |
| Lichter (Scholz) | [48] |
| Der Nachtwächter (Reinick) | [48] |
| Die beiden Wächter (Gellert) | [50] |
| Sturmnacht (Storm) | [51] |
| Was bei den Sternen war (Rosegger) | [52] |
| Um Mitternacht (Mörike) | [59] |
| Sternentrost (Greif) | [59] |
| Der Sternseher (Busse) | [59] |
| In Harmesnächten (Meyer) | [60] |
| Ansage (Greif) | [60] |
| Mondspuk (Weber) | [61] |
| Alter Spruch (Volksmund) | [63] |
| Stimme im Dunkeln (Dehmel) | [64] |
| Alp (Kopisch) | [64] |
| Närrische Träume (Falke) | [65] |
| Der Traum (Blüthgen) | [66] |
| Ein Traum (Sallet) | [67] |
| Traumland (Blüthgen) | [68] |
| Der kleine Häwelmann (Storm) | [69] |
| Kätzchen (Reinick) | [71] |
| Stille der Nacht (Keller) | [73] |
| Ammenuhr (Volksmund) | [73] |
| Die Nacht (Hesse) | [75] |
| Reiter bei Nacht (Tielo) | [75] |
| Tag und Nacht (Lingg) | [76] |
| Ewiger Wechsel (Weber) | [77] |
Weitere Anmerkungen zur Transkription
Offensichtliche Fehler wurden stillschweigend korrigiert. Zur besseren Navigation wurde der Titel des ersten Gedichts im Text ergänzt.
Korrekturen:
S. 6: wir → mir
Grüßend [mir] ans Bette,