[7.21.] 翠微無學嗣丹霞天然. 師因供養羅漢. 有僧問曰. 丹霞燒木佛. 和尙爲什麽供養羅漢. 師曰燒也不燒著. 供養亦一任供養. 又問供養羅漢. 羅漢還來也無. 師曰. 汝每日還喫麽. 僧無語. 師曰. 少有靈利底. (傅燈錄第十四.)
[7.22.] 雲栖祩宏 (1535–1615). (緇門崇行錄.)
[7.23.] 公案.
[7.24.] 攝 (or 接) 心.
[7.25.] 碧巖集. 臨濟錄.
[7.26.] 提唱.
[7.27.] 夢想國師. 遺誡曰. 我有三等弟子. 所謂猛烈放下諸緣. 專一究明己事. 是爲上等. 修行不純. 駁雜好學. 謂之中等. 自昧己靈光輝. 只嗜佛祖涎唾. 此名下等. 如其醉心於外書. 立業於文筆者. 此是剃頭俗人也. 不足以作下等. 矧乎飽食安眠放逸過時者. 謂之緇流耶. 古人喚作衣架飯嚢. 旣是非僧. 不許稱我弟子出入寺中及塔頭. 暫時出入尙以不容. 何况來求掛塔乎. 老僧作如是說. 莫言欠博愛之慈. 只要他知非改過. 堪爲祖門之種草耳.
[7.28.] 白隠禪師坐禪和讃.
| 衆生本来佛なり. | 水と氷の如くにて. |
| 水を離れて氷なく. | 衆生の外に佛なし. |
| 衆生近きを知らずして. | 遠く求むるはかなさよ. |
| 譬えば水の中に居て. | 渇を叫ぶが如くなり. |
| 長者の家の子となりて. | 貧里に迷ふに異ならず. |
| 六執輪廻の因緣は. | 己が愚痴の闇路なり. |
| 闇路にやみぢを踏そへて. | いつか生死を離るべき. |
| それ摩訶衍の禪定は. | 讃歎するに餘りあり. |
| 布施や持戒の諸波羅密. | 念佛懺悔修行等. |
| 其品多き諸善行. | 皆此中に帰するなり. |
| 一坐の功をなす人も. | 積みし無量の罪ほろぶ. |
| 悪趣何処にありぬべき. | 浄土即ち遠からず. |
| かたじけなくも此法を. | 一たび耳にふるるとき. |
| 讃歎随喜する人は. | 福を獲ること限りなし. |
| 況んや自ら廻向して. | 直に自性を證すれば. |
| 自性即ち無性にて. | 旣に戯論を離れたり. |
| 因果一如の門ひらけ. | 無二無三の道なほし. |
| 無相の相を相として. | 行くも帰るも餘所ならず. |
| 無念の念を念として. | 謠ふも舞ふも法の聲. |
| 三昧無礙の空ひろく. | 四智圓明の月冴えん. |
| 此時何をか求むべき. | 寂滅現前する故に. |
| 當処即ち蓮華國. | 此身即ち佛なり. |
[7.29.] 參禪.